पाठ 9 — मैया मैं नहिं माखन खायो
कवि: सूरदास | विधा: पद
📖 पद का सरल भावार्थ
इस पद में बाल कृष्ण और यशोदा के बीच का स्नेहपूर्ण संवाद है। कृष्ण अपने ऊपर लगे माखन चुराने के आरोप से बचने के लिए भोलेपन और तर्क के साथ अपनी बात रखते हैं। उनके बाल-सुलभ बहाने, चंचलता और यशोदा का वात्सल्य मिलकर वात्सल्य रस का सुंदर चित्र प्रस्तुत करते हैं।
💙 केंद्रीय भाव
- बाल-कृष्ण की चंचलता और भोला हास्य।
- माता यशोदा का वात्सल्य।
- माँ-बेटे के बीच का सहज संवाद।
- ब्रजभाषा की मधुरता।
📚 कठिन शब्द
- मैया — माता
- माखन — मक्खन
- ग्वाल-बाल — गाय चराने वाले बालक
- भोर — सुबह
- सखा — मित्र
❓ महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
- कृष्ण किस बात से इनकार करते हैं?
- कृष्ण अपनी सफाई में कौन-से तर्क देते हैं?
- पद में बाल-कृष्ण का कौन-सा रूप दिखाई देता है?
- यशोदा और कृष्ण के संबंध की विशेषता क्या है?
- पद में वात्सल्य रस कैसे प्रकट होता है?
🧠 HOTS / Competency
- कृष्ण के बहाने उनके बाल-मन की कौन-सी विशेषताएँ दिखाते हैं?
- माँ-बच्चे के संवाद में हास्य और प्रेम साथ-साथ कैसे आते हैं?
- आज के बच्चे अपनी किसी छोटी शरारत पर ऐसी सफाई दें तो संवाद कैसा होगा?
🧩 MCQs
- पद के कवि हैं — A. सूरदास B. रहीम C. तुलसीदास D. कबीर
- कृष्ण किस वस्तु के आरोप से इनकार करते हैं? A. माखन B. फल C. दूध D. मिठाई
- पद का प्रमुख रस है — A. वात्सल्य B. वीर C. करुण D. भयानक
उत्तर: 1-A, 2-A, 3-A
✍️ भाषा एवं लेखन
- पद के संवाद को आधुनिक हिंदी में लिखिए।
- ‘मेरी माँ और मैं’ विषय पर 100 शब्द लिखिए।
- पाँच ब्रजभाषा/हिंदी शब्दों के अर्थ लिखिए।
📄 कार्यपत्रिका
- पद का भावार्थ लिखिए।
- कृष्ण के तीन गुण लिखिए।
- वात्सल्य रस का अर्थ लिखिए।
- तीन MCQs हल कीजिए।
- एक चित्र बनाकर कृष्ण-यशोदा संवाद प्रस्तुत कीजिए।
